भाषायी दक्षता और मूल्यांकन
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भाषायी दक्षता और मूल्यांकन
भाषा में दक्षता का अर्थ है चारों आधारभूत कौशलों का विभिन्न संदर्भों में प्रभावशाली ढंग से प्रयोग करना।
1. ग्रहणात्मक कौशल (Receptive Skills)
- सुनना (श्रवण): सुनी हुई बातों का अर्थ समझना। यह अन्य सभी कौशलों का आधार है।
- पढ़ना (वाचन): केवल अक्षरों को जोड़ना नहीं, बल्कि भाव को ग्रहण करना। इसके दो रूप हैं - सस्वर वाचन (उच्चारण हेतु) और मौन वाचन (गहन अर्थ हेतु)।
2. अभिव्यक्तात्मक कौशल (Productive Skills)
- बोलना (मौखिक): अपने विचारों और भावों को स्पष्ट रूप से प्रकट करना।
- लिखना (लेखन): विचारों को लिपिबद्ध कर उन्हें स्थायी रूप देना। यह सबसे कठिन कौशल माना जाता है।
3. प्रमुख शिक्षण विधियाँ
- श्रुतलेख: सुनकर लिखना, जिससे वर्तनी (Spelling) में सुधार होता है।
- अनुलेख: किसी लेख को हू-ब-हू देखकर लिखना, जिससे लिखावट (Sulekh) सुधरती है।
- सस्वर वाचन: शिक्षक द्वारा आदर्श वाचन और छात्रों द्वारा अनुकरण वाचन।
4. सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (CCE)
- सतत: सीखने की प्रक्रिया के दौरान निरंतर चलने वाला मूल्यांकन।
- व्यापक: शैक्षिक (पढ़ाई) और सह-शैक्षिक (खेल, कला, व्यवहार) दोनों पक्षों का मूल्यांकन।
- उपकरण: पोर्टफोलियो (छात्र के कार्यों का संग्रह), अवलोकन, चेकलिस्ट और रेटिंग स्केल।
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